डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में लागू किए गए रेसिप्रोकल टैरिफ़ के तहत भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले कुछ सामानों को राहत मिली है, जबकि कुछ पर इसका असर पड़ेगा। वर्तमान जानकारी के आधार पर, यहाँ इसका विश्लेषण है:
भारत का कौन सा सामान बचा?
- जेनेरिक दवाएँ (फार्मास्यूटिकल्स): ट्रंप ने भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाली जेनेरिक दवाओं को टैरिफ़ से छूट दी है। इसका कारण यह है कि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली सस्ती दवाओं का बड़ा हिस्सा भारत से आता है। इससे भारतीय फार्मा उद्योग को राहत मिली है, क्योंकि यह क्षेत्र भारत के सबसे बड़े निर्यात क्षेत्रों में से एक है।
- ऊर्जा से संबंधित उत्पाद: कुछ ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण खनिजों और संबंधित निर्यातों को भी टैरिफ़ से छूट दी गई है। यह भारत के लिए फायदेमंद है, क्योंकि ऊर्जा क्षेत्र में कुछ विशेष सामग्री अमेरिका को भेजी जाती है।
किस पर होगा असर?
- डायमंड और ज्वेलरी: भारत की डायमंड इंडस्ट्री, खासकर लैब में बने हीरे और आभूषण, अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात होते हैं। ट्रंप ने इन पर टैरिफ़ लगाने की घोषणा की है, जिससे इस उद्योग को नुकसान हो सकता है। लागत बढ़ने से भारतीय हीरे और ज्वेलरी की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी।
- टेक्सटाइल (कपड़ा): भारतीय कपड़ा उद्योग पर भी टैरिफ़ का असर पड़ सकता है। हालाँकि भारत का कपड़ा बांग्लादेश जैसे देशों की तुलना में सस्ता रह सकता है (क्योंकि उन पर अधिक टैरिफ़ लगाया गया है), फिर भी लागत में वृद्धि से अमेरिकी बाजार में इसकी माँग कम हो सकती है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स: भारत से निर्यात होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों, जैसे स्मार्टफोन पार्ट्स और अन्य उपकरण, पर भी टैरिफ़ का बोझ पड़ सकता है। हालाँकि, अगर भारत इन उत्पादों को अन्य देशों (जैसे चीन या वियतनाम) की तुलना में सस्ता रख पाए, तो कुछ हद तक नुकसान कम हो सकता है।
- ऑटोमोबाइल पार्ट्स: ऑटो पार्ट्स पर 25% टैरिफ़ पहले से लागू है, और नए रेसिप्रोकल टैरिफ़ के तहत यह क्षेत्र भी प्रभावित हो सकता है। भारत हर साल अमेरिका को करीब 1.5 बिलियन डॉलर के ऑटो पार्ट्स निर्यात करता है।
- एल्यूमिनियम और स्टील: धातु क्षेत्र, खासकर एल्यूमिनियम और स्टील, पर पहले से ही 25% टैरिफ़ लागू है, और नए टैरिफ़ नियमों से इन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
कुल मिलाकर प्रभाव:
- ट्रंप ने भारत पर 26-27% टैरिफ़ लगाया है, जो अन्य देशों (जैसे चीन पर 34% या पाकिस्तान पर 29%) की तुलना में कम है। इससे भारत कुछ हद तक प्रतिस्पर्धी स्थिति में रह सकता है।
- अनुमान है कि भारत के अमेरिकी निर्यात में 2 से 7 बिलियन डॉलर तक की कमी आ सकती है, लेकिन घरेलू माँग पर भारत की निर्भरता इसे कुछ हद तक सुरक्षित रख सकती है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि भारत वैकल्पिक बाजारों की ओर ध्यान दे सकता है और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर इस प्रभाव को कम कर सकता है।
इस तरह, जहाँ फार्मा और कुछ ऊर्जा उत्पादों को राहत मिली है, वहीं ज्वेलरी, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ने की संभावना है।
