साउथ दिल्ली की एक सेशंस कोर्ट ने अमेरिका और ब्रिटेन में मौजूद गूगल, मेटा और बंबल के अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही दर्ज कराने की अभियोजन पक्ष की मांग फिलहाल खारिज कर दी है।
मई 2022 में हुए चर्चित श्रद्धा वॉल्कर मर्डर केस में अब एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। यह मामला उस कथित हत्या से जुड़ा है, जिसमें श्रद्धा के लिव-इन पार्टनर पर हत्या करने और शव के 35 टुकड़े करने का आरोप है
अर्जियां नए सिरे से दाखिल करनी होंगी
एडिशनल सेशन जज हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष को अपनी अर्जियां नए सिरे से दाखिल करनी होंगी, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव हो चुका है। अदालत ने कहा कि जुलाई 2025 में लागू हुए नए इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस एंड वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (EE-VC) नियमों ने 2021 के पुराने नियमों की जगह ले ली है।
कोर्ट से नहीं मिली वीडियो गवाही की इजाजत
बता दें कि पुराने नियमों के तहत विदेशी गवाहों की वीडियो गवाही के लिए आरोपी की सहमति जरूरी थी, लेकिन नए नियमों में यह शर्त हटा दी गई है। बचाव पक्ष पहले से ही वीडियो गवाही का विरोध करता रहा है और गवाहों की अदालत में व्यक्तिगत मौजूदगी की मांग करता आया है।
कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की मांग कर दी खारिज
हालांकि अदालत ने अभियोजन पक्ष के लिए रास्ता बंद नहीं किया है। 1 जून को पारित आदेश में अदालत ने साफ कहा कि नई कानूनी व्यवस्था के अनुरूप ताजा आवेदन दाखिल किए जा सकते हैं, ताकि मुकदमे की सुनवाई मौजूदा कानून के तहत आगे बढ़ सके।
शव के किए थे 35 टुकड़े
यह मामला मई 2022 में हुई श्रद्धा वॉल्कर की कथित हत्या से जुड़ा है। आरोप है कि उसके लिव-इन पार्टनर आफताब अमीन पूनावाला ने हत्या के बाद शव के 35 टुकड़े किए और उन्हें दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में फेंक दिया था। श्रोत NBT
